पाकिस्तान : टीएलपी के कट्टरपंथी नेताओं को अदालत ने दी जमानत, इमरान सरकार ने भी प्रतिबंध हटाया

सार

20 से अधिक मामलों में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई न्यायाधीश एजाज अहमद बटर और हुसैन भुट्टा ने की। अदालत ने सभी टीएलपी नेताओं को एक-एक लाख रुपये के बांड जमा करने का निर्देश दिया।

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पाकिस्तान में प्रतिबंधित इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कट्टरपंथी कई नेताओं को आतंक रोधी अदालत ने आतंकवाद से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज मामलों में जमानत दे दी है। 

डॉन अखबार ने बताया कि पिछले माह पंजाब प्रांत में टीएलपी कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के बाद सभी लोगों पर आतंकवाद से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

टीएलपी नेता हाफिज साद हुसैन रिजवी की रिहाई और ईशनिंदा वाला कार्टून प्रकाशित करने पर फ्रांसीसी दूत के निष्कासन की मांग लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच पाकिस्तान सरकार और प्रतिबंधित गुट के बीच एक गुप्त समझौता हुआ जिसके तहत मौजूदा कदम को देखा जा रहा है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, 20 से अधिक मामलों में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई न्यायाधीश एजाज अहमद बटर और हुसैन भुट्टा ने की। अदालत ने सभी टीएलपी नेताओं को एक-एक लाख रुपये के बांड जमा करने का निर्देश दिया।

सरकार पहले ही टीएलपी के 2,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को रिहा कर चुकी है और प्रतिबंध हटने के बाद, टीएलपी समूह सभी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र होगा।

टीएलपी के कार्यकर्ताओं ने लाहौर से इस्लामाबाद तक एक रैली शुरू की थी
पाकिस्तान के लाहौर में पिछले महीने हिंसा भड़क उठी थी। यहां पुलिस और इस्लामवादी संगठन तहरीक ए लब्बैक समर्थकों के बीच झड़प में कई पुलिसकर्मीयों सहित कम से कम एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में 15 लोग घायल भी हुए। 

कट्टरपंथी इस्लामवादी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कार्यकर्ताओं ने लाहौर से इस्लामाबाद तक एक रैली शुरू की थी। इसमें पाकिस्तान सरकार से उनके नेता साद रिजवी को रिहा करने की मांग जा रही थी जिसे पिछले साल फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शनों के लिए गिरफ्तार किया गया था।  

सुरक्षा बलों ने टीएलपी कार्यकर्ताओं पर 2500 से अधिक आंसू गैस के गोले दागकर रैली करने वालों को इस्लामाबाद की ओर बढ़ने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ हिंसक हो गई। साथ ही टीएलपी कार्यकर्ताओं ने पाक सुरक्षाबलों पर सैकड़ों राउंड फायरिंग की थी।

विस्तार

पाकिस्तान में प्रतिबंधित इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कट्टरपंथी कई नेताओं को आतंक रोधी अदालत ने आतंकवाद से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज मामलों में जमानत दे दी है। 

डॉन अखबार ने बताया कि पिछले माह पंजाब प्रांत में टीएलपी कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के बाद सभी लोगों पर आतंकवाद से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

टीएलपी नेता हाफिज साद हुसैन रिजवी की रिहाई और ईशनिंदा वाला कार्टून प्रकाशित करने पर फ्रांसीसी दूत के निष्कासन की मांग लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच पाकिस्तान सरकार और प्रतिबंधित गुट के बीच एक गुप्त समझौता हुआ जिसके तहत मौजूदा कदम को देखा जा रहा है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, 20 से अधिक मामलों में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई न्यायाधीश एजाज अहमद बटर और हुसैन भुट्टा ने की। अदालत ने सभी टीएलपी नेताओं को एक-एक लाख रुपये के बांड जमा करने का निर्देश दिया।

सरकार पहले ही टीएलपी के 2,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को रिहा कर चुकी है और प्रतिबंध हटने के बाद, टीएलपी समूह सभी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र होगा।

टीएलपी के कार्यकर्ताओं ने लाहौर से इस्लामाबाद तक एक रैली शुरू की थी

पाकिस्तान के लाहौर में पिछले महीने हिंसा भड़क उठी थी। यहां पुलिस और इस्लामवादी संगठन तहरीक ए लब्बैक समर्थकों के बीच झड़प में कई पुलिसकर्मीयों सहित कम से कम एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में 15 लोग घायल भी हुए। 

कट्टरपंथी इस्लामवादी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कार्यकर्ताओं ने लाहौर से इस्लामाबाद तक एक रैली शुरू की थी। इसमें पाकिस्तान सरकार से उनके नेता साद रिजवी को रिहा करने की मांग जा रही थी जिसे पिछले साल फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शनों के लिए गिरफ्तार किया गया था।  

सुरक्षा बलों ने टीएलपी कार्यकर्ताओं पर 2500 से अधिक आंसू गैस के गोले दागकर रैली करने वालों को इस्लामाबाद की ओर बढ़ने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ हिंसक हो गई। साथ ही टीएलपी कार्यकर्ताओं ने पाक सुरक्षाबलों पर सैकड़ों राउंड फायरिंग की थी।

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